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धमनी की बीमारी क्या है? पुस्तक के 6 सवाल-जवाब ✅

धमनी की बीमारी में धमनी कड़ी, टेढ़ी और मोटी हो जाती है। जानिए पुस्तक में इसके लक्षण और सावधानियाँ क्या बताई गई हैं।

रमेश वर्माप्रकाशित: 4 नवंबर 2026

धमनी की बीमारी में धमनी कड़ी, टेढ़ी और मोटी हो जाती है। पुस्तक के अनुसार यह बुढ़ापे के समय ज़्यादा होती है और नाड़ी कमज़ोर व धीमी पड़ने लगती है।

धमनी की बीमारी क्या है

पुस्तक के इस अध्याय में धमनी की बीमारी (ARTERIES DISEASE) की बात की गई है। इसमें धमनी की दीवार में चर्बी बनने (मेदाप्रजनन, एथेरोमे) के लक्षण बताए गए हैं।

पुस्तक के अनुसार यह रोग खासकर बुढ़ापे के समय ज़्यादा होता है।

धमनी की बीमारी के लक्षण: पुस्तक क्या बताती है

पुस्तक में ये लक्षण पहचान के लिए बताए गए हैं:

  • धमनी कड़ी, टेढ़ी, मोटी और टूटन जैसी हो जाती है।
  • नाड़ी कमज़ोर हो जाती है और उसकी गति धीमी होने लगती है।
  • हृदय में दर्द होने लगता है।
  • मूत्र-ग्रन्थि में जलन और सड़न पैदा हो जाती है।

पुस्तक में बताई गई औषधियाँ

पुस्तक में औषधियों के नाम और उनसे जुड़े लक्षण नीचे दिए गए हैं। ये पुस्तक की बात है, अपने आप दवा लेने की सलाह नहीं।

फास्फोरस

पुस्तक के अनुसार धमनी में जलन होने का रोग यदि नया हो, तो फास्फोरस औषधि की 3 शक्ति का प्रयोग बताया गया है।

फेरम-फास

पुस्तक के अनुसार धमनी रोग होने पर यदि सांस लेने में परेशानी हो, तो फेरम-फास औषधि का नाम बताया गया है।

पुस्तक में बताई गई सावधानियाँ

पुस्तक के विशेष हिस्से में रोगी के लिए ये बातें लिखी गई हैं:

  • रोगी को बिस्तर पर चित्त (पीठ के बल) सोना चाहिए।
  • ज़्यादा शारीरिक और मानसिक काम नहीं करना चाहिए।
  • उत्तेजक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।

कब देर न करें

पुस्तक में हृदय में दर्द और सांस की परेशानी का ज़िक्र है। ऐसा हो तो देर न करें, अपने चिकित्सक को तुरंत ज़रूर बताइए।

किताब से

इस रोग के होने पर धमनी कड़ी, टेड़ी, स्थूल और टूटन जैसी हो जाती है। यह विशेषरूप से बुढ़ापे के समय अधिक होता है।
होम्योपैथी प्रैक्टिस (Homeopathy Practice) — हिंदी बुक, पन्ना 204
पुस्तक की दो औषधियाँ और उनके लक्षण
दवापुस्तक में बताए लक्षण
फास्फोरसधमनी में जलन का रोग नया हो
फेरम-फासधमनी रोग में सांस लेने में परेशानी हो

भरोसेमंद स्रोतों से जानकारी

  • शुरुआत में लक्षण अक्सर तब दिखते हैं जब शरीर पर शारीरिक या भावनात्मक तनाव हो और उसे ज़्यादा ऑक्सीजन चाहिए। (स्रोत: अमेरिका का राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान)

धमनी की बीमारी पर लोग क्या पूछते हैं

1.धमनी की बीमारी क्या होती है

Dhamni ki bimari kya hoti hai

पुस्तक के अनुसार इसमें धमनी की दीवार में चर्बी बनती है और धमनी कड़ी, टेढ़ी व मोटी हो जाती है।

  • पुस्तक में इसे धमनी की दीवार का मेदाप्रजनन (एथेरोमे) कहा गया है।
  • धमनी में टूटन जैसी हालत भी बताई गई है।
  • यह रोग बुढ़ापे के समय ज़्यादा होता है।
  • इस रोग में नाड़ी कमज़ोर और धीमी होने लगती है।

2.धमनी की बीमारी के लक्षण क्या हैं

Dhamni ki bimari ke lakshan kya hain

पुस्तक में धमनी का कड़ा और टेढ़ा होना, कमज़ोर नाड़ी और हृदय में दर्द बताया गया है।

  • धमनी कड़ी, टेढ़ी, मोटी और टूटन जैसी हो जाती है।
  • नाड़ी कमज़ोर होती है और उसकी गति धीमी हो जाती है।
  • हृदय में दर्द होने लगता है।
  • मूत्र-ग्रन्थि में जलन और सड़न पैदा होती है।

3.धमनी की बीमारी बुढ़ापे में ज़्यादा क्यों बताई गई है

Dhamni ki bimari budhape mein zyada kyon hoti hai

पुस्तक में सिर्फ़ इतना लिखा है कि यह रोग खासकर बुढ़ापे के समय ज़्यादा होता है।

  • पुस्तक में इसकी वजह अलग से नहीं बताई गई है।
  • बुढ़ापे के समय धमनी के कड़ी होने की बात खास तौर पर लिखी है।
  • साथ में नाड़ी की कमज़ोरी भी बताई गई है।
  • लक्षण दिखें तो अपने चिकित्सक को ज़रूर बताइए।

4.धमनी की बीमारी में सांस लेने में परेशानी हो तो पुस्तक में कौन-सी औषधि बताई गई है

Dhamni ki bimari mein sans lene mein pareshani ho to kitab mein kaun si dawa batai gai hai

पुस्तक में ऐसी हालत के लिए फेरम-फास औषधि का नाम बताया गया है।

  • यह बात पुस्तक के अध्याय में धमनी रोग के साथ लिखी है।
  • सांस लेने में परेशानी साफ़ तौर पर लक्षण के रूप में बताई गई है।
  • औषधि अपने आप लेने के बजाय चिकित्सक से पूछिए।
  • सही पहचान के बाद ही सही औषधि चुनी जा सकती है।

5.धमनी में जलन का रोग नया हो तो पुस्तक में कौन-सी औषधि बताई गई है

Dhamni mein jalan ka rog naya ho to pustak mein kaun si dawa batai gai hai

पुस्तक में नए रोग के लिए फास्फोरस औषधि की 3 शक्ति का प्रयोग बताया गया है।

  • पुस्तक में रोग के नए होने की शर्त साफ़ लिखी गई है।
  • यहाँ फास्फोरस का नाम और उसकी शक्ति पुस्तक के अनुसार दी गई है।
  • खुराक पुस्तक के इस हिस्से में नहीं लिखी गई।
  • औषधि का चुनाव चिकित्सक की सलाह से कीजिए।

6.धमनी की बीमारी में रोगी के लिए पुस्तक की सावधानियाँ क्या हैं

Dhamni ki bimari mein rogi ke liye pustak ki savdhaniyan kya hain

पुस्तक में चित्त सोने और ज़्यादा काम व उत्तेजक पदार्थों से बचने की बात लिखी है।

  • रोगी को बिस्तर पर चित्त यानी पीठ के बल सोना चाहिए।
  • ज़्यादा शारीरिक काम नहीं करना चाहिए।
  • ज़्यादा मानसिक काम भी नहीं करना चाहिए।
  • उत्तेजक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।

यह लेख कैसे बना

इस पुस्तक पर आधारित: होम्योपैथी प्रैक्टिस (Homeopathy Practice) — हिंदी बुक (पन्ना 204–205) — लेखक: डॉ. राजपाल लांबा

यह लेख होम्योपैथी प्रैक्टिस (Homeopathy Practice) — हिंदी बुक (डॉ. राजपाल लांबा) पर आधारित है, AI की मदद से तैयार किया गया और Health Today संपादक ने जाँचा।

हमारी संपादकीय नीति

अपने चिकित्सक को ज़रूर बताइए — सही पहचान के बाद ही सही औषधि चुनी जा सकती है।

यह लेख सिर्फ़ जानकारी के लिए है। यह डॉक्टर की सलाह, जाँच या इलाज की जगह नहीं है — कोई भी दवा अपने चिकित्सक से पूछकर ही लें।

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आगे पढ़ने के लिए

ये सिर्फ़ आगे पढ़ने के लिए हैं — सबूत नहीं।

यह लेख डॉ. राजपाल लांबा की किताब "होम्योपैथी प्रैक्टिस (Homeopathy Practice) — हिंदी बुक" (पन्ना 204) में दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।

इस लेख का स्रोत

  1. होम्योपैथी प्रैक्टिस (Homeopathy Practice) — हिंदी बुक, Health Today Publicationक्यों जोड़ा: यह लेख इसी किताब के इन पन्नों से बना है।

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