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नींद सी आते रहना: पुस्तक में कौन-सी 8 औषधियाँ? ✅
नींद सी आते रहना हो तो पुस्तक में लक्षण के हिसाब से औषधियाँ बताई गई हैं। जानिए कौन-सा लक्षण किस औषधि के साथ लिखा है।
रमेश वर्माप्रकाशित: 4 नवंबर 2026
नींद सी आते रहना में इंसान को हर समय सोने का मन करता है। पुस्तक में इसके अलग-अलग लक्षणों के साथ 8 औषधियों का ज़िक्र है।
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नींद सी आते रहना और हर समय सोने का मन करना?
अगले दो मिनट में जानिए पुस्तक में इसके लक्षण कैसे बताए गए हैं।
नींद सी आते रहना यानी हर समय सोने का मन करना।
पुस्तक में इसके लिए अलग अध्याय है।
इसमें नींद के अलग-अलग लक्षण बताए गए हैं।
कुछ लोगों को पूरे दिन नींद आती रहती है।
रात को सोने जाते हैं तो नींद भाग जाती है।
यह लक्षण पुस्तक में अलग से लिखा गया है।
सबसे पहले देखिए कि नींद दिन में आती है या खाने के बाद।
रात को खाना खाते ही नींद आना पुस्तक में अलग लक्षण है।
नींद के साथ कमज़ोरी या पसीना आता है क्या?
पुस्तक में ऊंघने के साथ कमज़ोरी और बहुत पसीना भी एक लक्षण बताया गया है।
क्या नींद इतनी गहरी है कि शोर में भी नहीं टूटती?
पुस्तक में यह लक्षण अलग से बताया गया है।
इसे अलग से नोट कीजिए।
क्या उल्टी या मलक्रिया के बाद बहुत कमज़ोरी लगती है और तुरंत नींद आ जाती है?
पुस्तक में यह भी अलग लक्षण है।
सारे लक्षण एक कागज़ पर लिख लीजिए।
फिर पुस्तक के लक्षणों से मिलाइए और चिकित्सक को दिखाइए।
इससे बात समझाना आसान होता है।
अगर नींद इतनी ज़्यादा हो कि काम, पढ़ाई या सड़क पर चलने में दिक़्क़त हो, तो देर न करें।
अपने चिकित्सक को ज़रूर बताइए।
अगर अचानक बहुत कमज़ोरी लगे या होश संभालना मुश्किल हो, तो तुरंत अस्पताल जाइए।
ज़रूरत हो तो 108 पर फ़ोन कीजिए।
यह जानकारी होम्योपैथी प्रैक्टिस, डॉ. राजपाल लांबा से ली गई है।
नींद सी आते रहना हो तो पहले लक्षण पहचानिए, फिर पुस्तक से मिलाइए, और चिकित्सक को बताइए।
पूरा लेख पढ़िए, लिंक नीचे है।
अपने चिकित्सक को ज़रूर बताइए — सही पहचान के बाद ही सही औषधि चुनी जा सकती है।
पूरी जानकारी description और comment box में दी गई है।
नींद सी आते रहना क्या है
नींद सी आते रहना (Sleepiness – Narcolepsy) में इंसान को हर समय सोने का मन करता रहता है।
पुस्तक में इस हालत के लिए अलग-अलग लक्षणों के हिसाब से औषधियों का ज़िक्र है। हर औषधि के साथ उसके लक्षण लिखे हैं, इसलिए पहले लक्षण मिलाकर देखना ज़रूरी है।
नींद के लक्षण कैसे पहचानें
पुस्तक में नींद की अलग-अलग हालतें बताई गई हैं। देखिए आपके यहाँ कौन-सी बात मिलती है।
- हर समय नींद आती रहना और बस सोते रहने का मन करना।
- ऊंघने के साथ कमज़ोरी और बहुत पसीना आना।
- इतनी गहरी नींद कि शोर में भी न टूटे।
- रात को खाना खाते ही नींद आ जाना।
- दिन भर नींद आना, पर रात को नींद भाग जाना।
- उल्टी या मलक्रिया के बाद कमज़ोरी के साथ तुरंत नींद आ जाना।
पुस्तक में बताई गई औषधियाँ
नीचे हर औषधि के साथ पुस्तक में लिखे लक्षण दिए गए हैं।
इनडौल
हर समय नींद आती रहती है और मन बस सोते रहने का करता है।
पुस्तक में ऐसे लक्षणों के लिए इनडौल औषधि की 3 या 6 शक्ति बताई गई है।
ऐन्टिम-टार्ट (Antimonium Tartaricum)
रोगी हर समय ऊंघता सा रहता है, जैसे रात को सोया ही न हो। ऊंघने के साथ कमज़ोरी और बहुत पसीना आता है, और मन सिर्फ सोने का करता है।
पुस्तक में इन लक्षणों के आधार पर ऐन्टिम-टार्ट औषधि की 30 शक्ति बताई गई है।
ओपियम (Opium)
नींद इतनी गहरी आती है कि कान के पास ज़ोर का शोर हो तब भी नहीं टूटती। दिन में काम करते हुए भी रोगी ऊंघता रहता है।
पुस्तक में ऐसे लक्षणों के लिए ओपियम औषधि की 30 शक्ति बताई गई है।
नक्स-मौस्केटा
रोगी को हर समय सिर्फ सोने का मन करता है और कोई भी परेशानी हो तो नींद आने लगती है। जागते हुए भी वह सपनों की दुनिया में खोया रहता है और बहुत गहरी नींद आती है।
पुस्तक में इन लक्षणों के लिए नक्स-मौस्केटा औषधि की 6 या 30 शक्ति बताई गई है।
लाइकोपोडियम
रात के समय भोजन करते ही रोगी को नींद आ जाती है।
पुस्तक में इस लक्षण के लिए लाइकोपोडियम औषधि की 30 शक्ति बताई गई है।
सिन्नेबेरिस
रोगी को पूरे दिन नींद आती रहती है, लेकिन रात को सोने जाता है तो नींद भाग जाती है।
पुस्तक में इन लक्षणों के लिए सिन्नेबेरिस औषधि का ज़िक्र है।
फॉसफोरस (Phosphorus)
रोगी को दिन में नींद आती है, लेकिन रात को बिल्कुल नींद नहीं आती। नींद में सपने आते रहते हैं, बेचैनी रहती है और उल्टे-सीधे सपने आते हैं।
पुस्तक में इन लक्षणों के लिए फॉसफोरस औषधि की 30 शक्ति बताई गई है।
एथूजा
मलक्रिया या उल्टी के बाद रोगी अपने को इतना कमज़ोर महसूस करता है कि तुरंत नींद आ जाती है।
पुस्तक में इन लक्षणों के लिए एथूजा औषधि की 3 या 30 शक्ति बताई गई है।
चिकित्सक को कब बताएँ
अगर नींद इतनी ज़्यादा हो कि काम करने, पढ़ने या सड़क पर चलने में दिक़्क़त होने लगे, तो देर न करें, अपने चिकित्सक को ज़रूर बताइए।
किताब से
मलक्रिया के बाद या उल्टी करने के बाद रोगी अपने को इतना कमजोर महसूस करता है कि तुरन्त ही उसे नींद आ जाती है।
| दवा | पुस्तक में बताए लक्षण |
|---|---|
| इनडौल | हर समय नींद, सोते रहने का मन |
| ऐन्टिम-टार्ट | ऊंघना, कमज़ोरी, बहुत पसीना |
| ओपियम | इतनी गहरी नींद कि शोर में न टूटे |
| नक्स-मौस्केटा | हर समय सोने का मन, सपनों में खोया रहना |
| लाइकोपोडियम | रात को भोजन करते ही नींद |
| साइक्लेमेन | हर समय नींद, काम का मन नहीं, रात को खाँसी |
| फॉसफोरस | दिन में नींद, रात को नींद नहीं |
| एथूजा | उल्टी या मलक्रिया के बाद कमज़ोरी और नींद |
नींद सी आते रहना: लोग ये भी पूछते हैं
1.नींद सी आते रहना हो तो पुस्तक में किन लक्षणों का ज़िक्र है
nind si ate rahna ho to pustak mein kin lakshanon ka zikr hai
पुस्तक में हर समय नींद आने के साथ कई अलग लक्षण बताए गए हैं।
- हर समय सोते रहने का मन करना।
- ऊंघने के साथ कमज़ोरी और पसीना आना।
- बहुत गहरी नींद, जो शोर में भी न टूटे।
- दिन में नींद, पर रात को नींद भाग जाना।
- उल्टी या मलक्रिया के बाद कमज़ोरी के साथ नींद आ जाना।
2.हर समय नींद आना और सोने का मन करे तो पुस्तक में कौन-सी औषधि बताई गई है
har samay nind aana aur sone ka man kare to pustak mein kaun si aushadhi hai
पुस्तक में इसके लिए इनडौल और नक्स-मौस्केटा औषधि का ज़िक्र है।
- इनडौल में रोगी को हर समय नींद आती रहती है और मन सोते रहने का करता है।
- इनडौल की 3 या 6 शक्ति पुस्तक में बताई गई है।
- नक्स-मौस्केटा में रोगी को हर समय सोने का ही मन करता है।
- इसमें जागते हुए भी रोगी सपनों की दुनिया में खोया रहता है।
- नक्स-मौस्केटा की 6 या 30 शक्ति पुस्तक में बताई गई है।
3.दिन में नींद आना और रात को नींद न आना हो तो पुस्तक में क्या लिखा है
din mein nind aana aur raat ko nind na aana ho to pustak mein kya likha hai
पुस्तक में इस लक्षण के लिए सिन्नेबेरिस और फॉसफोरस औषधि का ज़िक्र है।
- सिन्नेबेरिस में पूरे दिन नींद आती रहती है।
- इसी में रात को सोने जाने पर नींद भाग जाती है।
- फॉसफोरस में दिन में नींद आती है, पर रात को बिल्कुल नींद नहीं आती।
- फॉसफोरस में नींद में सपने और बेचैनी भी बताई गई है।
- फॉसफोरस की 30 शक्ति पुस्तक में बताई गई है।
4.खाना खाते ही नींद आना हो तो पुस्तक में कौन-सी औषधि बताई गई है
khana khate hi nind aana ho to pustak mein kaun si aushadhi hai
पुस्तक में रात के भोजन के बाद नींद के लिए लाइकोपोडियम का ज़िक्र है।
- लाइकोपोडियम में रात को भोजन करते ही नींद आ जाती है।
- पुस्तक में यह लक्षण अलग से लिखा गया है।
- इसकी 30 शक्ति पुस्तक में बताई गई है।
- अपना लक्षण पुस्तक के लक्षण से मिलाकर देखना ज़रूरी है।
5.बहुत गहरी नींद आए तो पुस्तक में किस औषधि का ज़िक्र है
bahut gehri nind aaye to pustak mein kis aushadhi ka zikr hai
पुस्तक में बहुत गहरी नींद के लिए ओपियम औषधि का ज़िक्र है।
- ओपियम में नींद इतनी गहरी होती है कि कान के पास शोर हो तब भी नहीं टूटती।
- इसमें दिन में काम करते हुए भी रोगी ऊंघता रहता है।
- पुस्तक में ओपियम की 30 शक्ति बताई गई है।
- यह लक्षण इनडौल या लाइकोपोडियम वाले लक्षण से अलग लिखा गया है।
6.नींद के साथ कमज़ोरी और पसीना हो तो पुस्तक में कौन-सी औषधि बताई गई है
nind ke saath kamzori aur pasina ho to pustak mein kaun si aushadhi hai
पुस्तक में इन लक्षणों के लिए ऐन्टिम-टार्ट औषधि का ज़िक्र है।
- इसमें रोगी हर समय ऊंघता सा रहता है।
- ऐसा लगता है जैसे वह रात को सोया ही न हो।
- ऊंघने के साथ कमज़ोरी और बहुत पसीना भी आता है।
- मन सिर्फ सोने का करता है।
- पुस्तक में ऐन्टिम-टार्ट की 30 शक्ति बताई गई है।
7.उल्टी या मलक्रिया के बाद नींद आए तो पुस्तक में क्या बताया गया है
ulti ya malkriya ke baad nind aaye to pustak mein kya bataya gaya hai
पुस्तक में इस लक्षण के लिए एथूजा औषधि का ज़िक्र है।
- एथूजा में रोगी मलक्रिया या उल्टी के बाद खुद को बहुत कमज़ोर महसूस करता है।
- कमज़ोरी इतनी होती है कि उसे तुरंत नींद आ जाती है।
- पुस्तक में एथूजा की 3 या 30 शक्ति बताई गई है।
- यह लक्षण दूसरी औषधियों से अलग लिखा गया है।
यह लेख कैसे बना
इस पुस्तक पर आधारित: होम्योपैथी प्रैक्टिस (Homeopathy Practice) — हिंदी बुक (पन्ना 47–48) — लेखक: डॉ. राजपाल लांबा
यह लेख होम्योपैथी प्रैक्टिस (Homeopathy Practice) — हिंदी बुक (डॉ. राजपाल लांबा) पर आधारित है, AI की मदद से तैयार किया गया और Health Today संपादक ने जाँचा।
अपने चिकित्सक को ज़रूर बताइए — सही पहचान के बाद ही सही औषधि चुनी जा सकती है।
यह लेख सिर्फ़ जानकारी के लिए है। यह डॉक्टर की सलाह, जाँच या इलाज की जगह नहीं है — कोई भी दवा अपने चिकित्सक से पूछकर ही लें।
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आगे पढ़ने के लिए
ये सिर्फ़ आगे पढ़ने के लिए हैं — सबूत नहीं।
यह लेख डॉ. राजपाल लांबा की किताब "होम्योपैथी प्रैक्टिस (Homeopathy Practice) — हिंदी बुक" (पन्ना 48) में दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।
इस लेख का स्रोत
- होम्योपैथी प्रैक्टिस (Homeopathy Practice) — हिंदी बुक, Health Today Publicationक्यों जोड़ा: यह लेख इसी किताब के इन पन्नों से बना है।
