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नींद न आना क्यों होता है? पुस्तक की 9 औषधियाँ ✅
नींद न आना कई बार किसी दूसरे रोग का लक्षण होता है। पुस्तक के अनुसार कारण और लक्षण के हिसाब से औषधियों की जानकारी पढ़िए।
रमेश वर्माप्रकाशित: 4 नवंबर 2026
नींद न आना पुस्तक के अनुसार कई बार किसी दूसरे रोग का लक्षण होता है। इसमें 9 औषधियाँ लक्षण के हिसाब से बताई गई हैं। चुनाव मुख्य रोग के लक्षणों के साथ नींद के लक्षण देखकर होता है।
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रात भर करवटें बदल रहे हैं और नींद न आना रुक ही नहीं रहा?
अगले दो मिनट में पुस्तक की बातें जानिए।
नींद न आना यानी सोने की कोशिश के बाद भी नींद का न आना।
पुस्तक के अनुसार यह कई बार किसी दूसरे रोग का लक्षण होता है।
पुस्तक में लिखा है कि सिर्फ़ नींद लाने की कोई ख़ास औषधि नहीं है।
मुख्य रोग के लक्षण देखकर चुनाव होता है।
इसलिए हर किसी के लिए एक जैसी औषधि नहीं होती, यह बात पुस्तक साफ़ बताती है।
पुस्तक के अनुसार जब नींद न आना ही अकेला लक्षण हो, तब कैल्केरिया कार्ब, कॉफिया और ऐकोनाइट जैसी औषधियों का ज़िक्र मिलता है।
लेकिन चुनाव चिकित्सक ही करते हैं।
पुस्तक में ज़्यादा चाय या कॉफी, ज़्यादा खाना या उपवास, कब्ज़ और चिंता जैसे कारण बताए गए हैं।
ख़ुशी या बुरी ख़बर से उत्तेजना, डर, बुज़ुर्गों की घबराहट, बच्चों के दाँत निकलने का समय।
पुस्तक में हर हाल अलग लिखा है।
इसलिए अपने हाल को ध्यान से देखिए।
रात में जागकर काम करने वालों, जैसे चौकीदार और नर्स, में भी यह दिक़्क़त पुस्तक में बताई गई है।
अपनी दिनचर्या के साथ लक्षण लिखिए।
लक्षण लिखकर अपने चिकित्सक को पूरा हाल बताइए।
सही पहचान के बाद ही सही औषधि चुनी जा सकती है।
नींद की दिक़्क़त कई दिन चले या दिन में बहुत परेशानी हो, तो चिकित्सक को ज़रूर दिखाइए।
लक्षणों की सूची साथ ले जाइए, इससे बात समझाना आसान रहता है।
अगर हालत अचानक बिगड़े, तो देर न करें।
108 पर फ़ोन करें या सीधे अस्पताल पहुँचें।
यह जानकारी होम्योपैथी प्रैक्टिस, डॉ. राजपाल लांबा से ली गई है।
नींद न आना कई बार किसी दूसरे रोग का लक्षण है।
कारण और लक्षण पहचानिए, चिकित्सक से बात कीजिए।
पूरा लेख पढ़िए।
अपने चिकित्सक को ज़रूर बताइए — सही पहचान के बाद ही सही औषधि चुनी जा सकती है।
पूरी जानकारी description और comment box में दी गई है।
नींद न आना (Insomnia) क्या है और पुस्तक इसे कैसे समझाती है
नींद न आना यानी रात को सोने की कोशिश के बाद भी नींद का न आना। पुस्तक के अनुसार यह दिक़्क़त कई बार किसी दूसरे रोग का लक्षण होती है।
पुस्तक में लिखा है कि होम्योपैथी में सिर्फ़ नींद लाने के लिए कोई ख़ास औषधि नहीं है। मुख्य रोग के लक्षणों के साथ नींद के लक्षण भी देखकर ही औषधि चुनी जाती है।
पुस्तक के अनुसार जब नींद न आना ही अकेला लक्षण हो और कोई दूसरा लक्षण न हो, तब कैल्केरिया कार्ब, कॉफिया और ऐकोनाइट जैसी औषधियों का ज़िक्र मिलता है।
नींद न आने के कारण क्या बताए गए हैं
पुस्तक में नींद न आने के ये कारण गिनाए गए हैं। कई बार दूसरे रोगों की वजह से भी यह शिकायत हो सकती है।
- सिर में ख़ून की अधिकता।
- सिर का ज़्यादा ठंडा होना।
- बहुत ज़्यादा खाना या उपवास।
- बहुत ज़्यादा चाय या कॉफी पीना।
- मन में उत्तेजना रहना।
- कब्ज़ की दिक़्क़त या बहुत ज़्यादा चिंता।
किन हालात में नींद नहीं आती: पुस्तक के उदाहरण
पुस्तक में लक्षण पहचानने पर ज़ोर है, इसलिए अलग-अलग हालात अलग बताए गए हैं। ये बातें पुस्तक से ली गई हैं।
- ख़ुशी की ख़बर, इनाम या लॉटरी लगने से मन उत्तेजित हो जाए।
- डर, घबराहट या बुरी ख़बर के बाद नींद न आए।
- बुज़ुर्गों में घबराहट के साथ चैन से न लेट पाना।
- रात में जागकर काम करने वालों, जैसे चौकीदार और नर्स में।
- बच्चों में दाँत निकलने के समय।
- चाय पीने, दस्त या कमज़ोरी के बाद।
- दोपहर में खाने के बाद तेज़ नींद और जागने पर सुस्ती।
लक्षण के हिसाब से पुस्तक में बताई गई औषधियाँ
नीचे हर औषधि के आगे वही लक्षण हैं जो पुस्तक में लिखे गए हैं। शक्ति के आँकड़े भी पुस्तक के हैं। कौन-सी औषधि किसके लिए सही है, यह चिकित्सक ही तय करते हैं।
चायना (China Officinalis)
पुस्तक में ख़ून बहने या दस्त की वजह से नींद न आना, शरीर में बहुत कमज़ोरी, या चाय पीने से हुई नींद की दिक़्क़त के लिए इसका नाम आया है। शक्ति 6 या 30 लिखी है।
कैल्केरिया कार्ब (Calcarea Carbonica)
पुस्तक में इसकी 30 शक्ति बताई गई है। लिखा है कि इससे आने वाली नींद नशे जैसी नहीं, स्वस्थ नींद होती है।
कॉफिया (Coffea Cruda)
पुस्तक के अनुसार ख़ुशी, इनाम या किसी ख़बर से मन इतना उत्तेजित हो जाए कि आँख बंद ही न हो, तब इसका ज़िक्र है।
- मन में एक के बाद एक विचार आते रहना और विचारों की भीड़ लगना।
- रात में देर तक न सो पाना, सोएँ भी तो ऊँघते रहना।
- चौंककर उठ बैठना और सपने देखना।
- गुदाद्वार में खुजली की वजह से नींद न आना।
- पुस्तक में शक्ति 200, 6 और 30 लिखी हैं।
जेल्सीमियम (Gelsemium Sempervirens)
पुस्तक के अनुसार भावनात्मक उत्तेजना, डर, आतंक या बुरी ख़बर से नींद न आए तो इसका नाम आया है।
- बहुत ज़्यादा काम करने वालों के लिए।
- कारोबार की चिंता में रात को बेचैनी और सुबह उठते ही फिर चिंता में डूब जाना।
कैम्फर
पुस्तक में नींद न आने पर कैम्फर के मूल-अर्क की गोलियों का ज़िक्र है।
बेलाडोना (Belladonna)
पुस्तक के अनुसार दिमाग़ में ख़ून की अधिकता की वजह से मरीज़ ऊँघता रहता है, पर थकावट के कारण सो नहीं पाता। शक्ति 30 लिखी है।
- नींद में खर्राटे भरना, पर नींद गहरी न होना।
- अचानक चिल्लाकर या चीखकर उठना।
- मांसपेशियाँ फड़कना, मुँह चलते रहना और दाँत किटकिटाना।
- जगाने पर उत्तेजित हो जाना या घबराकर, डरकर उठना।
काक्युलस
पुस्तक के अनुसार रात में बहुत जागने से नींद न आए तो इसका ज़िक्र है। शक्ति 3 से 30 लिखी है।
रात में जागकर काम करने वाले, जैसे चौकीदार और नर्स, और नींद आने पर चक्कर आने की बात भी पुस्तक में है।
कैमोमिला (Chamomilla)
पुस्तक के अनुसार दाँत निकलने के समय बच्चे को जम्हाई आए, वह ऊँघता रहे, फिर भी सो न पाए और बेचैन रहे, तब इसका ज़िक्र है। शक्ति 12 लिखी है।
पैसिफ्लोरा इंकारनेट
पुस्तक में नींद न आने की दिक़्क़त के लिए इस औषधि के मूल-अर्क का नाम आया है।
नींद की दिक़्क़त लंबी चले तो क्या करें
पुस्तक यही सिखाती है कि नींद न आना कई बार किसी दूसरे रोग का लक्षण होता है। इसलिए दिक़्क़त कई दिन चले, तो अपने चिकित्सक को पूरा हाल बताइए। इसी पर सही औषधि का चुनाव टिका है।
किताब से
सिर में रक्त की अधिकता, सिर का अधिक ठंडा होना, अधिक खाना, उपवास, बहुत ज्यादा चाय या कॉफी का सेवन करना, मानसिक उत्तेजना होना, कब्ज की समस्या होना या अधिक चिंता होना आदि कारणों से यह रोग होता है।
| दवा | पुस्तक में बताए लक्षण |
|---|---|
| कॉफिया | ख़ुशी या ख़बर से उत्तेजना, विचारों की भीड़ |
| जेल्सीमियम | डर या बुरी ख़बर, कारोबार की चिंता |
| ऐकोनाइट | बुज़ुर्गों में घबराहट, गर्मी, चैन न मिलना |
| बेलाडोना | ऊँघना पर सो न पाना, चीखकर उठना |
| काक्युलस | रात में ज़्यादा जागना |
| कैमोमिला | बच्चों में दाँत निकलते समय बेचैनी |
| चायना | कमज़ोरी, दस्त या चाय के कारण |
| लाइकोडियम | दोपहर में तेज़ नींद, फिर सुस्ती |
भरोसेमंद स्रोतों से जानकारी
- नींद न आना एक आम दिक़्क़त है, जिसमें नींद आने या बनी रहने में परेशानी होती है। (स्रोत: अमेरिका का राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान)
- तनाव, चिंता, चाय-कॉफी और शोर जैसी चीज़ें नींद न आने के आम कारण बताई गई हैं। (स्रोत: ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा)
नींद न आने पर लोग ये भी पूछते हैं
1.नींद न आने के कारण क्या बताए गए हैं
Nind na aane ke karan kya bataye gaye hain
पुस्तक में सिर में ख़ून की अधिकता, ज़्यादा चाय-कॉफी और चिंता जैसे कारण गिनाए गए हैं।
- सिर में ख़ून की अधिकता और सिर का ज़्यादा ठंडा होना कारण बताए गए हैं।
- बहुत ज़्यादा खाना या उपवास भी कारण में गिना गया है।
- बहुत ज़्यादा चाय या कॉफी का सेवन कारण है।
- मन की उत्तेजना, कब्ज़ और बहुत ज़्यादा चिंता भी इसमें शामिल हैं।
- दूसरे कई रोगों की वजह से भी यह शिकायत हो सकती है।
2.क्या नींद न आना किसी दूसरे रोग का लक्षण हो सकता है
Kya nind na aana kisi dusre rog ka lakshan ho sakta hai
जी हाँ, पुस्तक के अनुसार यह कई बार किसी दूसरे रोग का लक्षण होता है।
- इसलिए पुस्तक में मुख्य रोग के हिसाब से औषधि चुनने की बात है।
- चुनी जाने वाली औषधि में मुख्य रोग के लक्षणों के साथ नींद के लक्षण भी होने चाहिए।
- पुस्तक में लिखा है कि सिर्फ़ नींद लाने की कोई ख़ास औषधि होम्योपैथी में नहीं है।
- हर औषधि का नींद पर कुछ प्रभाव पड़ता है, ऐसा पुस्तक में लिखा है।
3.नींद न आने की होम्योपैथिक दवा लक्षण के हिसाब से कैसे देखी जाती है
Nind na aane ki homeopathic dawa lakshan ke hisab se kaise dekhi jati hai
पुस्तक में हर औषधि के आगे अलग लक्षण लिखे गए हैं, इसलिए पहले लक्षण पहचाने जाते हैं।
- ख़ुशी या ख़बर से उत्तेजना हो तो पुस्तक में कॉफिया का नाम आया है।
- डर या बुरी ख़बर के बाद नींद न आए तो जेल्सीमियम का ज़िक्र है।
- खर्राटे और चीखकर उठने जैसे लक्षणों में बेलाडोना का नाम आया है।
- दोपहर में तेज़ नींद और सुस्ती पर लाइकोडियम बताई गई है।
4.ख़ुशी या बुरी ख़बर से नींद न आए तो पुस्तक में क्या लिखा है
Khushi ya buri khabar se nind na aaye to pustak mein kya likha hai
पुस्तक में ख़ुशी की ख़बर के लिए कॉफिया और बुरी ख़बर के लिए जेल्सीमियम का नाम आया है।
- कॉफिया में मन उत्तेजित हो जाता है और आँख बंद नहीं होती।
- कॉफिया वाले हाल में विचारों की भीड़ लग जाती है।
- जेल्सीमियम में डर, आतंक या बुरी ख़बर से मन विचलित हो जाता है।
- पुस्तक में कॉफिया की शक्ति 200, 6 और 30 लिखी है।
5.बुज़ुर्गों को नींद न आए तो पुस्तक में कौन-सी औषधि बताई गई है
Buzurgon ko nind na aaye to pustak mein kaun si aushadhi batai gayi hai
पुस्तक में बुज़ुर्गों के लिए ऐकोनाइट का ज़िक्र है, जिसकी शक्ति 30 लिखी है।
- इसमें नींद न आने के साथ घबराहट होती है।
- गर्मी लगना भी पुस्तक में लक्षण के रूप में लिखा है।
- चैन से न लेट पाना और करवट बदलते रहना भी लक्षण हैं।
- पुस्तक में किसी भी तरह की बेचैनी में इसका नाम आया है।
6.रात में जागकर काम करने वालों को नींद न आए तो पुस्तक में क्या बताया है
Raat mein jagkar kaam karne walon ko nind na aaye to pustak mein kya bataya hai
पुस्तक में चौकीदार और नर्स जैसे रात में जागने वालों के लिए काक्युलस का ज़िक्र है।
- रात में बहुत ज़्यादा जागने से आई नींद की दिक़्क़त का ज़िक्र है।
- पुस्तक में शक्ति 3 से 30 तक लिखी है।
- नींद आने पर चक्कर आने की बात भी पुस्तक में है।
- ऐसे लोगों के लिए पुस्तक में उदाहरण के तौर पर चौकीदार और नर्स का नाम है।
7.बच्चे को दाँत निकलते समय नींद न आए तो पुस्तक में कौन-सी औषधि है
Bachche ko daant nikalte samay nind na aaye to pustak mein kaun si aushadhi hai
पुस्तक में ऐसे बच्चों के लिए कैमोमिला का ज़िक्र है, जिसकी शक्ति 12 लिखी है।
- बच्चे को जम्हाई आती है और वह ऊँघता रहता है।
- इसके बावजूद उसे नींद नहीं आती।
- बच्चे में हर वक़्त बेचैनी बनी रहती है।
- पुस्तक में यह सब दाँत निकलने के समय के लक्षण बताए गए हैं।
यह लेख कैसे बना
इस पुस्तक पर आधारित: होम्योपैथी प्रैक्टिस (Homeopathy Practice) — हिंदी बुक (पन्ना 25–28) — लेखक: डॉ. राजपाल लांबा
यह लेख होम्योपैथी प्रैक्टिस (Homeopathy Practice) — हिंदी बुक (डॉ. राजपाल लांबा) पर आधारित है, AI की मदद से तैयार किया गया और Health Today संपादक ने जाँचा।
अपने चिकित्सक को ज़रूर बताइए — सही पहचान के बाद ही सही औषधि चुनी जा सकती है।
यह लेख सिर्फ़ जानकारी के लिए है। यह डॉक्टर की सलाह, जाँच या इलाज की जगह नहीं है — कोई भी दवा अपने चिकित्सक से पूछकर ही लें।
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आगे पढ़ने के लिए
ये सिर्फ़ आगे पढ़ने के लिए हैं — सबूत नहीं।
यह लेख डॉ. राजपाल लांबा की किताब "होम्योपैथी प्रैक्टिस (Homeopathy Practice) — हिंदी बुक" (पन्ना 25) में दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।
इस लेख का स्रोत
- होम्योपैथी प्रैक्टिस (Homeopathy Practice) — हिंदी बुक, Health Today Publicationक्यों जोड़ा: यह लेख इसी किताब के इन पन्नों से बना है।
