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चिड़चिड़ापन क्या है? पुस्तक में कौन-सी 4 औषधियाँ? ✅
चिड़चिड़ापन के लक्षण क्या हैं और पुस्तक में किस लक्षण पर कौन-सी औषधि बताई गई है — सीधी, आसान भाषा में।
रमेश वर्माप्रकाशित: 5 नवंबर 2026
डॉक्टर द्वारा जाँचा गया: डॉ. राजपाल लांबा, BHMS (1993), MD होम्योपैथी (2007) · जाँचा गया: 5 नवंबर 2026
चिड़चिड़ापन यानी स्वभाव का बहुत झुंझलाया हुआ हो जाना, जिसमें बिना बात गुस्सा और झगड़ा होता है। पुस्तक में लक्षण के हिसाब से 4 औषधियों का ज़िक्र है।
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चिड़चिड़ापन के लक्षण और पुस्तक की औषधियाँ अगले दो मिनट में समझिए, पूरी बात ध्यान से सुनिए।
चिड़चिड़ापन में हर किसी के लक्षण अलग होते हैं, इसलिए पहले लक्षण पहचानना ज़रूरी है।
आगे: लक्षण, पुस्तक की औषधियाँ, फिर चिकित्सक को कब बताएँ।
चिड़चिड़ापन यानी स्वभाव का बहुत झुंझलाया हुआ हो जाना।
कोई बिना बात लड़ता है, तो कोई ज़रा-सी बात पर भड़क जाता है।
पुस्तक में इसके कई अलग-अलग लक्षण बताए गए हैं, जिन्हें आगे समझेंगे।
पहला लक्षण: जो दूसरों पर धौंस जमाए और उनकी गलतियाँ निकालता रहे।
ऐसे लक्षण में पुस्तक में लाइकोपोडियम औषधि का ज़िक्र है।
दूसरा लक्षण: बिना बात लड़ना और गुस्से में सामान तोड़ देना।
ऐसे लक्षण में पुस्तक में नक्स-वोमिका औषधि का ज़िक्र है।
तीसरा लक्षण: दाँत निकालते समय बच्चा गोद में ही रहना चाहे और नीचे उतारते ही रोने लगे।
पुस्तक में कैमोमिला औषधि का ज़िक्र है।
चौथा लक्षण: कभी बहुत चिड़चिड़ा और कभी हँसी-मज़ाक के मूड में रहना।
इस लक्षण के साथ पुस्तक में ओरम-मेट औषधि का ज़िक्र है।
पाँचवाँ लक्षण: समझाने वाले से ही लड़ना, ज़रा तेज़ चलने पर थक जाना और चेहरा कभी लाल, कभी पीला होना।
पुस्तक में फेरम-मेट औषधि का ज़िक्र है।
अगर गुस्सा बार-बार आए या काबू से बाहर हो जाए, तो देर न करें।
तुरंत डॉक्टर या अस्पताल जाइए, ज़रूरत हो तो 108 पर कॉल कीजिए।
यह जानकारी होम्योपैथी प्रैक्टिस, डॉ. राजपाल लांबा से ली गई है।
सार यह है: चिड़चिड़ापन में लक्षण देखकर पुस्तक में अलग-अलग औषधियों का ज़िक्र है।
पूरा लेख पढ़िए और अपने चिकित्सक को ज़रूर बताइए।
अपने चिकित्सक को ज़रूर बताइए — सही पहचान के बाद ही सही औषधि चुनी जा सकती है।
पूरी जानकारी description और comment box में दी गई है।
चिड़चिड़ापन क्या है? पुस्तक के हिसाब से आसान मतलब
चिड़चिड़ापन (PEEVISHNESS) का मतलब है स्वभाव का बहुत झुंझलाया हुआ हो जाना — बिना बात गुस्सा आना, छोटी-सी बात पर झगड़ पड़ना।
पुस्तक के इस अध्याय में चिड़चिड़ापन के अलग-अलग लक्षण बताए गए हैं और हर लक्षण के सामने किसी औषधि का ज़िक्र है। नीचे वही बातें पुस्तक के शब्दों के आधार पर सीधे-सादे ढंग से रखी गई हैं।
लक्षण से पहचान: पुस्तक में कौन-सी औषधि किस लक्षण पर
पुस्तक में औषधि लक्षण देखकर बताई गई है। मोटे तौर पर लक्षण इस तरह के हैं:
- दूसरों की गलतियाँ निकालना और धौंस जमाना — पुस्तक में लाइकोपोडियम का ज़िक्र है।
- बिना बात लड़ना और गुस्से में सामान तोड़ना — पुस्तक में नक्स-वोमिका का ज़िक्र है।
- दाँत निकालते बच्चे का गोद में रहना और हर चीज़ माँगना — पुस्तक में कैमोमिला का ज़िक्र है।
- कभी बहुत चिड़चिड़ा, कभी हँसी-मज़ाक के मूड में रहना — पुस्तक में ओरम-मेट का ज़िक्र है।
- समझाने वाले से ही लड़ना, चेहरा कभी लाल कभी पीला — पुस्तक में फेरम-मेट का ज़िक्र है।
चिड़चिड़ापन में पुस्तक की औषधियाँ, एक-एक करके
हर औषधि का ज़िक्र पुस्तक के उसी लक्षण के साथ है। औषधि लेने से पहले अपने चिकित्सक से सलाह ज़रूर लीजिए।
लाइकोपोडियम
पुस्तक के अनुसार जब रोगी अपने आप दूसरों से लड़ने लगे, दूसरों पर धौंस जमाए, दूसरों की गलतियाँ निकाले और ज़रा-सी बात पर झगड़ बैठे, तो इन लक्षणों में लाइकोपोडियम औषधि की 30 शक्ति का ज़िक्र है।
- दूसरों से पंगा लेने का मौका ढूँढते रहना भी इसी लक्षण में गिना गया है।
नक्स-वोमिका (Nux Vomica)
पुस्तक में लिखा है कि जब स्वभाव बहुत ज़्यादा चिड़चिड़ा हो जाए और रोगी बिना बात लड़ने लगे, समझाने वाले से ही झगड़ने लगे, तो नक्स-वोमिका औषधि की 30 शक्ति दी जा सकती है।
- ऐसे रोगी गुस्से में घर का सामान तोड़ने लगते हैं और कुर्सी जैसी चीज़ों को लात मारकर गिरा देते हैं।
- पुस्तक के अनुसार ऐसे रोगी को बदहजमी की शिकायत भी रहती है।
कैमोमिला (Chamomilla)
पुस्तक में बताया गया है कि दाँत निकालते समय छोटा बच्चा बहुत चिड़चिड़ा हो जाता है। इस तरह के लक्षणों में कैमोमिला औषधि का ज़िक्र है।
- बच्चा हर समय गोद में रहना चाहता है और नीचे उतारते ही रोने लगता है।
- बाहर ले जाने पर हर चीज़ माँगता है और न मिलने पर तेज़ रोता है।
- कोई चीज़ दिला भी दी जाए तो वह उसे फेंक देता है।
ओरम-मेट
पुस्तक के अनुसार जब रोगी कभी बहुत चिड़चिड़ा हो जाए और कभी बहुत हँसी-मज़ाक के मूड में रहे, तो ओरम-मेट औषधि की 30 शक्ति का ज़िक्र है। पुस्तक में इसके साथ लाभ मिलने की बात लिखी है।
चिकित्सक को कब बताएँ
चिड़चिड़ापन बार-बार हो, गुस्से पर काबू न रहे या रोज़ के काम और घर के रिश्तों में दिक़्क़त आने लगे, तो देर न करें। अपने चिकित्सक को ज़रूर बताइए।
किताब से
छोटा बच्चा जब दांत निकाल रहा होता है तो वह बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा-सा हो जाता है, हर समय गोद में ही रहना चाहता है अगर नीचे उतार दो तो तुरन्त ही रोने लगता है।
| दवा | पुस्तक में बताए लक्षण |
|---|---|
| लाइकोपोडियम | दूसरों पर धौंस जमाना, गलतियाँ निकालना |
| नक्स-वोमिका | बिना बात लड़ना, गुस्से में सामान तोड़ना |
| कैमोमिला | दाँत निकालते बच्चे का गोद में रहना, रोना |
| ओरम-मेट | कभी चिड़चिड़ा, कभी हँसी-मज़ाक का मूड |
| फेरम-मेट | समझाने वाले से लड़ना, चेहरा लाल-पीला |
चिड़चिड़ापन पर लोग ये भी पूछते हैं
1.चिड़चिड़ापन में पुस्तक में कौन-सी औषधियाँ बताई गई हैं
Chirchirapan mein pustak mein kaun si aushadhiyan batai gayi hain
पुस्तक में इस अध्याय में लक्षण के हिसाब से कुछ औषधियों का ज़िक्र है।
- लाइकोपोडियम का ज़िक्र दूसरों पर धौंस जमाने वाले स्वभाव के साथ है।
- नक्स-वोमिका का ज़िक्र बिना बात झगड़ने और सामान तोड़ने के लक्षण के साथ है।
- कैमोमिला का ज़िक्र दाँत निकालते चिड़चिड़े बच्चे के साथ है।
- ओरम-मेट का ज़िक्र कभी चिड़चिड़े, कभी हँसी-मज़ाक वाले मूड के साथ है।
- फेरम-मेट का ज़िक्र समझाने वाले से लड़ने और चेहरा लाल-पीला होने के साथ है।
2.बिना बात झगड़ने की आदत पर पुस्तक में कौन-सी औषधि का ज़िक्र है
Bina baat jhagadne ki aadat par pustak mein kaun si aushadhi ka zikr hai
पुस्तक में इस लक्षण के साथ नक्स-वोमिका और फेरम-मेट दोनों का ज़िक्र है।
- नक्स-वोमिका वाले रोगी समझाने पर भी उसी से झगड़ने लगते हैं।
- फेरम-मेट वाले रोगी भी लोगों से बिना बात लड़ते रहते हैं।
- लाइकोपोडियम वाले रोगी ज़रा-सी बात पर झगड़ा कर बैठते हैं।
- तीनों के ज़िक्र पुस्तक में अलग-अलग पूरे लक्षणों के साथ हैं।
3.बच्चे का चिड़चिड़ापन दाँत निकलते समय हो तो पुस्तक क्या कहती है
Bachche ka chirchirapan dant nikalte samay ho to pustak kya kehti hai
पुस्तक में ऐसे बच्चे के लिए कैमोमिला औषधि का ज़िक्र है।
- बच्चा हर समय गोद में ही रहना चाहता है।
- नीचे उतारते ही वह तुरंत रोने लगता है।
- बाहर घुमाने पर हर चीज़ माँगता है और न मिलने पर तेज़ रोता है।
- कोई चीज़ दिला दी जाए तो भी वह उसे फेंक देता है।
4.गुस्से में सामान तोड़ने वाले लक्षण पर पुस्तक में कौन-सी औषधि है
Gusse mein saman todne wale lakshan par pustak mein kaun si aushadhi hai
पुस्तक में इस लक्षण के साथ नक्स-वोमिका का ज़िक्र है।
- रोगी का स्वभाव बहुत ज़्यादा चिड़चिड़ा हो जाता है।
- वह बिना बात दूसरों से लड़ने लगता है।
- गुस्से में कुर्सी जैसी चीज़ों को लात मारकर गिरा देता है।
- पुस्तक के अनुसार ऐसे रोगी को बदहजमी की शिकायत भी रहती है।
5.कभी चिड़चिड़ा और कभी हँसी-मज़ाक वाले मूड पर कौन-सी औषधि बताई गई है
Kabhi chidchida aur kabhi hansi mazak wale mood par kaun si aushadhi batai gayi hai
पुस्तक में इस लक्षण के साथ ओरम-मेट का ज़िक्र है।
- रोगी कभी बहुत ज़्यादा चिड़चिड़ा हो जाता है।
- कभी वही रोगी बहुत हँसी-मज़ाक के मूड में रहता है।
- पुस्तक में इस लक्षण के साथ ओरम-मेट की 30 शक्ति लिखी है।
- यह पुस्तक की जानकारी है, इसलिए चिकित्सक से सलाह ज़रूर लें।
6.चेहरा कभी लाल कभी पीला और जल्दी थकान हो तो पुस्तक में कौन-सी औषधि है
Chehra kabhi lal kabhi peela aur jaldi thakan ho to pustak mein kaun si aushadhi hai
पुस्तक में इस लक्षण के साथ फेरम-मेट का ज़िक्र है।
- रोगी दिखने में पहलवान जैसा लगता है।
- ज़रा तेज़ बोलने या चलने से ही थक जाता है।
- चेहरा कभी बिल्कुल लाल और कभी बिल्कुल पीला हो जाता है।
- साथ में वह समझाने वाले से ही लड़ने लगता है।
डॉक्टर की अपनी बात
पुस्तक में चिड़चिड़ापन के अलग-अलग लक्षणों के सामने कुछ औषधियों का ज़िक्र है। लक्षण पहचानना सबसे पहला क़दम है। अपने चिकित्सक से सलाह लेकर ही कोई औषधि चुनिए।
— डॉ. राजपाल लांबा, BHMS (1993), MD होम्योपैथी (2007)
यह लेख कैसे बना
इस पुस्तक पर आधारित: होम्योपैथी प्रैक्टिस (Homeopathy Practice) — हिंदी बुक (पन्ना 49–50) — लेखक: डॉ. राजपाल लांबा
डॉ. राजपाल लांबा, BHMS (1993), MD होम्योपैथी (2007) ने जाँचा (5 नवंबर 2026)।
यह लेख होम्योपैथी प्रैक्टिस (Homeopathy Practice) — हिंदी बुक (डॉ. राजपाल लांबा) पर आधारित है, AI की मदद से तैयार किया गया और Health Today संपादक ने जाँचा।
अपने चिकित्सक को ज़रूर बताइए — सही पहचान के बाद ही सही औषधि चुनी जा सकती है।
यह लेख सिर्फ़ जानकारी के लिए है। यह डॉक्टर की सलाह, जाँच या इलाज की जगह नहीं है — कोई भी दवा अपने चिकित्सक से पूछकर ही लें।
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आगे पढ़ने के लिए
ये सिर्फ़ आगे पढ़ने के लिए हैं — सबूत नहीं।
यह लेख डॉ. राजपाल लांबा की किताब "होम्योपैथी प्रैक्टिस (Homeopathy Practice) — हिंदी बुक" (पन्ना 49) में दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।
इस लेख का स्रोत
- होम्योपैथी प्रैक्टिस (Homeopathy Practice) — हिंदी बुक, Health Today Publicationक्यों जोड़ा: यह लेख इसी किताब के इन पन्नों से बना है।
